इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry) Podcast Por Lokesh Gulyani arte de portada

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

De: Lokesh Gulyani
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Spoken word poetry in Hindi by Lokesh GulyaniCopyright Lokesh Gulyani Ciencias Sociales Filosofía
Episodios
  • Episode 58 - ज़हनी पचड़ा
    Apr 13 2026
    सच कह रहा हूं मैं, अब पाप करने के बारे में भी सोचने लगा हूं, आख़िर कहीं से तो किक और एड्रीनलीन रश मिले। मुझे बचाने की मत सोचो, अपनी फ़िक्र करो।
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  • Episode 57 - तीसरी घंटी
    Mar 22 2026
    मुझे तो याद नहीं पड़ता कोई ऐसा क्षण जिसे मैं कह सकूं कि मैं सही समय पर सही जगह खड़ा था। मैं हमेशा ग़लत समय पर एंट्री - एग्जिट लेता रहा।
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  • Episode 56 - कसप
    Feb 11 2026
    वो अभी भी राह देख रहा है उसकी कि वो कभी लौट कर आए और उसे कहे कि ' अब तुम भी आगे बढ़ सकते हो, तुम मुझसे मुक्त हुए ' पर अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं और ये रिश्ता कसप के डीडी की तरह मारगांठ बनकर उसकी कुंडलिनी में उतर गया और उसके अगले जन्म का प्रारब्ध भी बन गया।
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