इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry) Podcast Por Lokesh Gulyani arte de portada

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

De: Lokesh Gulyani
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Spoken word poetry in Hindi by Lokesh GulyaniCopyright Lokesh Gulyani Ciencias Sociales Filosofía
Episodios
  • Episode 56 - कसप
    Feb 11 2026
    वो अभी भी राह देख रहा है उसकी कि वो कभी लौट कर आए और उसे कहे कि ' अब तुम भी आगे बढ़ सकते हो, तुम मुझसे मुक्त हुए ' पर अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं और ये रिश्ता कसप के डीडी की तरह मारगांठ बनकर उसकी कुंडलिनी में उतर गया और उसके अगले जन्म का प्रारब्ध भी बन गया।
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    5 m
  • Episode 55 - Nervous Ninetees
    Feb 3 2026
    दूर कहीं एक मुसाफ़िर इसी ओर आता दिख रहा है। मैं अंगीठी पर कहवा चढ़ा देता हूं। आज कितने दिनों बाद कोई मेरी ड्यौढ़ी चढ़ेगा। बहुत दिन हो गए मुझे किसी हाड़-मांस के पुतले से बात किए हुए।
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  • Episode 54 - Self-Harm
    Jan 24 2026
    पहले लिखना बहुत स्वाभाविक रूप से चलता था, अब डराने लगा है। अब कागज़ के आगे बैठते ही लगता है कि क्या लिखूं जो ये कागज़ अमर हो जाए और यही सोचते-सोचते वो कागज़ एक सस्ती मौत मर जाता है।
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