Episodios

  • कर्म योगी और कर्म संन्यासी
    Feb 10 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस गहन आध्यात्मिक एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के उन मूल सिद्धांतों की व्याख्या की गई है, जो आत्मा, कर्म और संसार के आपसी संबंध को स्पष्ट करते हैं। यह चर्चा बताती है कि आत्मा अपने स्वभाव में शुद्ध, अविनाशी और निर्लिप्त है, और शरीर द्वारा किए गए कर्म उसे वास्तव में बाँध नहीं सकते।

    इस एपिसोड में कर्म योगी और कर्म संन्यासी के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझाया गया है—जहाँ एक संसार में रहकर निष्काम भाव से कर्तव्य निभाता है, वहीं दूसरा त्याग के मार्ग को अपनाता है। दोनों मार्ग भिन्न होते हुए भी एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं—मोक्ष

    मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य कर्तापन के अहंकार को त्याग देता है और स्वयं को ईश्वर की योजना का माध्यम मानता है, तब वह संसार में रहते हुए भी आंतरिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त कर सकता है। यह एपिसोड आत्मज्ञान के माध्यम से बंधनों से मुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

    यह चर्चा विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो

    गीता दर्शन,

    कर्म योग और संन्यास,

    आत्मा की प्रकृति,

    और आधुनिक जीवन में आध्यात्मिक शांति

    को समझना चाहते हैं।

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    15 m
  • निष्काम कर्म और कर्तव्य पालन
    Feb 3 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस विशेष एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के सार तत्व पर आधारित उस गूढ़ ज्ञान की चर्चा की गई है, जो निष्काम कर्म और कर्तव्य पालन को आध्यात्मिक जीवन का मूल आधार बताता है।

    भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता उसे मानसिक तनाव और बंधन की ओर ले जाती है। यह एपिसोड समझाता है कि कर्तापन का अहंकार आत्मिक उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है, और जब व्यक्ति स्वयं को ईश्वर का मात्र एक माध्यम मानकर कर्म करता है, तब जीवन सहज और संतुलित हो जाता है।

    इस चर्चा में यह भी बताया गया है कि आसक्ति का त्याग न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। निस्वार्थ भाव से किए गए कर्म आत्मा की शुद्धि करते हैं और जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं।

    यह एपिसोड उन सभी श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो

    आधुनिक जीवन की भागदौड़ में

    मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतुलन और जीवन का उद्देश्य खोज रहे हैं।

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    15 m
  • कर्म योग सिद्धांत की व्यापक और व्यावहारिक व्याख्या
    Jan 27 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस एपिसोड में भगवद्गीता में वर्णित कर्म योग सिद्धांत की व्यापक और व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत की गई है। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि निष्काम कर्म ही आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मोक्ष का वास्तविक आधार है।

    यह एपिसोड बताता है कि संसार में कर्म से बचना असंभव है, लेकिन फल की आसक्ति ही मनुष्य को कर्मबंधन में बाँधती है। जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन अनासक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण के साथ करता है, तब वही कर्म साधना बन जाता है।

    इस चर्चा में मन के निग्रह, निरंतर अभ्यास और मानसिक चंचलता पर नियंत्रण के महत्व को भी समझाया गया है। यह एपिसोड विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो तनावपूर्ण जीवन में संतुलन, शांति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की खोज में हैं।

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  • कर्म योग के दार्शनिक और व्यावहारिक सिद्धांत
    Jan 20 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस विशेष एपिसोड में हम श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित कर्म योग के दार्शनिक और व्यावहारिक सिद्धांतों को गहराई से समझते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि इस संसार में निष्काम कर्म ही आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और मोक्ष का वास्तविक मार्ग है।

    यह एपिसोड बताता है कि मनुष्य कर्म किए बिना रह ही नहीं सकता, परंतु कर्म के फल की आसक्ति ही उसे बंधन में बाँधती है। श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि जब व्यक्ति फल की चिंता छोड़कर केवल कर्तव्य-बोध से कर्म करता है, तब वही कर्म साधना बन जाता है।

    इस चर्चा में कर्म योग की तुलना ज्ञान योग और भक्ति योग से करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि कर्म योग गृहस्थ जीवन के लिए सबसे अधिक व्यावहारिक और सुलभ मार्ग है। परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में रहते हुए भी कैसे आध्यात्मिक उन्नति संभव है — इसका स्पष्ट मार्गदर्शन इस एपिसोड में मिलता है।

    यह एपिसोड विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए है जो:

    • जीवन के तनाव और द्वंद्व से मुक्त होना चाहते हैं

    • गीता के ज्ञान को दैनिक जीवन में अपनाना चाहते हैं

    • कर्म, अनासक्ति और समर्पण का सही अर्थ समझना चाहते हैं

    कृष्णवाणी के साथ यह श्रवण-यात्रा आपको सिखाएगी कि

    अनासक्ति और समर्पण के साथ किया गया प्रत्येक कर्म ही मनुष्य को बंधनों से मुक्त कर परमात्मा की ओर ले जाता है।

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    16 m
  • सांख्य योग की शाश्वत प्रासंगिकता
    Jan 13 2026

    आज के इस विशेष एपिसोड में कृष्णवाणी पॉडकास्ट आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और मानसिक द्वंद्व के बीच सांख्य योग की शाश्वत प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है। श्रीमद्भगवद्गीता के गूढ़ उपदेशों के माध्यम से यह चर्चा स्पष्ट करती है कि आत्मज्ञान और अनासक्ति जैसे प्राचीन सिद्धांत आज भी मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आंतरिक स्थिरता प्रदान कर सकते हैं।

    इस एपिसोड में बताया गया है कि कैसे व्यक्ति भौतिक सफलता-असफलता से ऊपर उठकर अपनी अमर आत्मा को पहचान सकता है और समभाव के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर सकता है। भगवान श्रीकृष्ण का सांख्य दर्शन यह सिखाता है कि जीवन में केवल कर्म करना ही नहीं, बल्कि कर्म करते हुए आसक्ति का त्याग करना ही सच्ची मुक्ति का मार्ग है।

    यह एपिसोड उन सभी श्रोताओं के लिए है जो

    तनाव-मुक्त जीवन की तलाश में हैं

    आध्यात्मिक दृष्टि से जीवन को समझना चाहते हैं

    गीता के ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में अपनाना चाहते हैं

    कृष्णवाणी के साथ यह श्रवण-यात्रा आपको कर्म और आध्यात्मिकता के संतुलन द्वारा जीवन जीने की कला सिखाएगी।

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    15 m
  • सांख्य दर्शन
    Jan 6 2026

    इस एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के दूसरे अध्याय में वर्णित सांख्य दर्शन के गूढ़ आध्यात्मिक संदेश का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह चर्चा आत्मा की अमरता और शरीर की नश्वरता के बीच के मूलभूत अंतर को स्पष्ट करती है, जिससे जीवन और मृत्यु के प्रति हमारी दृष्टि बदल जाती है।

    कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में अर्जुन के मन में उत्पन्न मोह, भय और कर्तव्य-द्वंद्व को दूर करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने जिस दिव्य ज्ञान का उपदेश दिया, वही सांख्य दर्शन इस अध्याय का केंद्रीय विषय है। श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि आत्मा अविनाशी है और शरीर केवल एक अस्थायी आवरण है—इस बोध से ही व्यक्ति अपने धर्म और कर्तव्य का सही अर्थ समझ पाता है।

    एपिसोड में निष्काम कर्म के सिद्धांत को भी सरल भाषा में समझाया गया है, जहाँ श्रीकृष्ण यह शिक्षा देते हैं कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता में नहीं। सांख्य ज्ञान और कर्मयोग का यह समन्वय ही मनुष्य को मानसिक द्वंद्व से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।

    यह प्रसंग उन सभी श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो जीवन के संघर्षों में आध्यात्मिक स्पष्टता, मानसिक शांति और कर्तव्यबोध की तलाश में हैं।

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    16 m
  • सांख्य याेग:अद्वैत ज्ञान और द्वैत कर्म का संतुलन
    Dec 23 2025

    कृष्णवाणी के इस विशेष एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के दो प्रमुख मार्गों—

    सांख्य योग और कर्मयोग—के बीच के गहरे और सूक्ष्म अंतर्संबंधों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की गई है।

    यह चर्चा स्पष्ट करती है कि जहाँ सांख्य योग आत्मज्ञान, विवेक और सत्य की खोज का मार्ग दिखाता है, वहीं कर्मयोग मनुष्य को बिना फल की चिंता किए अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है; उस ज्ञान को जीवन में उतारने के लिए निष्काम कर्म आवश्यक है।

    इस एपिसोड में यह भी समझाया गया है कि कैसे

    अद्वैत ज्ञान और द्वैत कर्म का संतुलन

    मनुष्य को मानसिक द्वंद्व, भ्रम और आसक्ति से मुक्त करता है तथा उसे शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

    यह प्रसंग उन सभी श्रोताओं के लिए मार्गदर्शक है जो सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी आध्यात्मिक मुक्ति का पथ खोजना चाहते हैं।

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  • आत्म तत्व और परमात्म तत्व: आत्मा की अमरता, अद्वैत और मोक्ष का रहस्य
    Dec 16 2025

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट की इस विशेष चर्चा में हम प्रस्तुत कर रहे हैं—

    अध्याय 8: आत्म तत्व और परमात्म तत्व,

    जो श्रीमद्भगवद्गीता के दूसरे अध्याय पर आधारित एक गहन आध्यात्मिक विवेचन है।

    इस एपिसोड में हम तीन मूलभूत प्रश्नों पर विचार करते हैं—

    आत्मा क्या है और क्यों वह अमर है?

    आत्मा और परमात्मा के बीच क्या वास्तव में कोई भेद है?

    और आत्मा का अंतिम लक्ष्य क्या है—मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?

    भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि आत्मा अजन्मा, नित्य और अविनाशी है,

    शरीर केवल एक अस्थायी आवरण है।

    अद्वैत दर्शन के अनुसार, आत्मा और परमात्मा एक ही तत्त्व हैं—

    भेद केवल अज्ञान का है।

    इस चर्चा में गीता के महत्वपूर्ण श्लोकों—

    2.20 (आत्मा की अमरता) और

    2.47 (निष्काम कर्म)

    की व्याख्या के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि

    निष्काम कर्म, आत्मज्ञान और भक्ति

    ही मोक्ष प्राप्ति का शाश्वत मार्ग है।

    यह एपिसोड उन सभी श्रोताओं के लिए है

    जो जीवन के सत्य, आत्मबोध और आध्यात्मिक मुक्ति की खोज में हैं।

    जय श्रीकृष्ण।

    हरि ॐ तत्सत्।

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    16 m