कृष्णवाणी: गीता के 18 योग Podcast Por Ramesh Kumar Chauhan arte de portada

कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

De: Ramesh Kumar Chauhan
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कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश, आधुनिक जीवन की भाषा में।


श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का अनंत मार्गदर्शन है। इस पॉडकास्ट में हम गीता के 18 योगों की गहराई को सरल और आधुनिक भाषा में प्रस्तुत करेंगे। हर एपिसोड में आप पाएँगे—

  • जीवन की चुनौतियों को संतुलित ढंग से कैसे सामना करें।
  • कर्म, भक्ति और ज्ञान योग का वास्तविक अर्थ।
  • ध्यान, आत्म-नियंत्रण और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग।
  • गीता के श्लोकों को आज के कार्यस्थल, परिवार और समाज में कैसे लागू करें।

यह श्रवण यात्रा न केवल आध्यात्मिक चिंतन कराएगी, बल्कि आपके भीतर शांति, आत्मविश्वास और जीवन की स्पष्टता भी जगाएगी।

आइए, सुनें भगवान श्रीकृष्ण की अमर वाणी

और खोजें आधुनिक जीवन में मोक्ष और आनंद का मार्ग।

Copyright 2025 Ramesh Kumar Chauhan
Espiritualidad
Episodios
  • कर्म, कर्तव्य और काम: भिन्नता और समानता
    Mar 25 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस प्रेरणादायी एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के गहन दर्शन के माध्यम से कर्म, कर्तव्य और काम (इच्छा) के बीच के सूक्ष्म अंतर को विस्तार से समझाया गया है। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को यह बताते हैं कि मनुष्य के लिए कर्म का त्याग करना संभव नहीं है, इसलिए उसे निष्काम भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

    इस एपिसोड में स्पष्ट किया गया है कि जब व्यक्ति अपने कार्यों को फल की आसक्ति और स्वार्थ से मुक्त होकर ईश्वर को समर्पित करता है, तब वही कर्म बंधन का कारण न बनकर आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग बन जाते हैं। साथ ही, यह चर्चा आंतरिक संयम (Self-Control) और बाहरी कर्म (Action) के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालती है, जो मानसिक शांति और स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    एपिसोड में यह भी बताया गया है कि ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय ही जीवन में सफलता, संतुलन और लोक-कल्याण का आधार है। यह गीता का ऐसा व्यावहारिक संदेश है, जो आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच भी उतना ही प्रासंगिक है।

    यह एपिसोड विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो:

    निष्काम कर्म और कर्तव्य के सिद्धांत को समझना चाहते हैं

    गीता के दर्शन को अपने जीवन में लागू करना चाहते हैं

    मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन की खोज में हैं

    कर्म, ज्ञान और भक्ति के समन्वय को जानना चाहते हैं

    कृष्णवाणी के साथ यह आध्यात्मिक यात्रा आपको सिखाएगी कि

    कर्तव्य ही पूजा है,

    समर्पण ही साधना है,

    और निष्काम कर्म ही मोक्ष का मार्ग है।

    Más Menos
    23 m
  • स्वधर्म बनाम परधर्म | गीता के अनुसार सही जीवन मार्ग
    Mar 18 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस विशेष एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के महत्वपूर्ण श्लोकों के माध्यम से ज्ञान, कर्म और आत्म-संयम के गहन सिद्धांतों की व्याख्या प्रस्तुत की गई है। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि काम और क्रोध, जो रजोगुण से उत्पन्न होते हैं, मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं और ये उसकी बुद्धि एवं विवेक को ढक देते हैं।

    इस एपिसोड में यह समझाया गया है कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों, मन और बुद्धि पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। साथ ही, स्वधर्म का पालन करने का महत्व भी बताया गया है, जो पराये कर्तव्यों का अनुकरण करने से कहीं अधिक श्रेष्ठ और कल्याणकारी है।

    चर्चा में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आत्मा मन और बुद्धि से भी परे है, और जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तब वह अपने भीतर के दुर्जेय शत्रुओं—काम और क्रोध—पर विजय प्राप्त कर सकता है।

    यह एपिसोड उन श्रोताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है जो:

    आत्म-संयम और मानसिक नियंत्रण सीखना चाहते हैं

    गीता के ज्ञान को जीवन में लागू करना चाहते हैं

    आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाकर शांति पाना चाहते हैं

    आध्यात्मिक विकास और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं

    कृष्णवाणी के साथ यह श्रवण-यात्रा आपको सिखाएगी कि

    आत्मज्ञान, स्वधर्म और संयम ही

    जीवन में संतुलन, शांति और मोक्ष का मार्ग हैं।

    Más Menos
    23 m
  • कर्मयोग का रहस्य | निष्काम कर्म, कर्तव्य और समर्पण का गीता संदेश |
    Mar 10 2026

    कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस प्रेरणादायी एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के कुछ महत्वपूर्ण श्लोकों के माध्यम से कर्मयोग के गूढ़ सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया गया है। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन निष्काम भाव से करना चाहिए, अर्थात् बिना किसी फल की इच्छा और अहंकार के।

    इस चर्चा में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समाज में श्रेष्ठ व्यक्तियों का आचरण दूसरों के लिए आदर्श बनता है, इसलिए लोक-कल्याण के उद्देश्य से कर्म करना अत्यंत आवश्यक है। गीता का यह संदेश हमें सिखाता है कि संसार में होने वाले सभी कार्य प्रकृति के गुणों द्वारा संचालित होते हैं, किंतु अज्ञान के कारण मनुष्य स्वयं को ही उनका कर्ता मान लेता है और कर्म बंधन में फँस जाता है।

    एपिसोड में यह भी बताया गया है कि जब व्यक्ति अपने कर्मों को परमात्मा को समर्पित कर आध्यात्मिक चेतना के साथ जीवन जीता है, तब वह चिंताओं से मुक्त होकर अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़ रह सकता है।

    यह आध्यात्मिक संदेश न केवल आत्म-संतुष्टि और मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और ईश्वर के प्रति समर्पण के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा भी देता है।

    यह एपिसोड उन सभी श्रोताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो गीता के कर्मयोग सिद्धांत, निष्काम कर्म, और आध्यात्मिक जीवन के व्यावहारिक मार्ग को समझना चाहते हैं।

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    24 m
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