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  • तुतनखामुन का 'श्राप': एक आधुनिक मिथक का खंडन
    Oct 26 2025
    This Podcast is based on my Research"The "Curse" of Tutankhamun: A Deconstruction of a Modern Myth " शोध के आधार पर "तूतनखामुन के अभिशाप" का सारांश दिया गया है:"तूतनखामुन का अभिशाप" (Curse of Tutankhamun) एक आधुनिक मिथक है, न कि कोई प्राचीन वास्तविकता। इसे 20वीं सदी के मीडिया और अध्यात्मवादियों द्वारा गढ़ा गया था, और इसके कथित सबूतों को ऐतिहासिक, चिकित्सीय और सांख्यिकीय विश्लेषण द्वारा व्यवस्थित रूप से खारिज कर दिया गया है।इस किंवदंती की शुरुआत 1923 में उत्खनन के प्रायोजक लॉर्ड कार्नारवॉन की मृत्यु से हुई। हालाँकि, उनकी मृत्यु रहस्यमयी नहीं थी:चिकित्सीय कारण: कार्नारवॉन की मृत्यु सेप्टिसीमिया (रक्त संक्रमण) से हुई, जो निमोनिया में बदल गया। यह एक संक्रमित मच्छर के काटने से हुआ था, जिसे उन्होंने शेविंग करते समय काट लिया था।कमजोरी: वे पहले से ही एक पुरानी दुर्घटना के कारण "नाजुक" स्वास्थ्य स्थिति में थे, जिसने उन्हें संक्रमण के प्रति विशिष्ट रूप से "असंवेदनशील" बना दिया था।अभिशाप की कहानी स्पष्ट कारणों से सक्रिय रूप से गढ़ी गई थी:मीडिया प्रतिद्वंद्विता: लॉर्ड कार्नारवॉन ने कहानी के विशेष अधिकार द टाइम्स (लंदन) को बेच दिए थे। अन्य पत्रकारों ने, जो इस बड़ी कहानी से बाहर हो गए थे, "तथ्यों के स्थान पर सनसनीखेज गपशप" छापी।प्रसिद्ध हस्तियों का समर्थन: उपन्यासकार मैरी कोरेली और सर आर्थर कॉनन डॉयल (जिन्होंने "तत्वों" का सिद्धांत दिया) जैसी हस्तियों ने अलौकिक स्पष्टीकरणों को बढ़ावा दिया।मनगढ़ंत "सबूत": प्रेस ने कई "सबूत" गढ़े, जैसे: हॉवर्ड कार्टर की कैनरी (पक्षी) को एक कोबरा द्वारा मार दिया जाना; कार्नारवॉन की मृत्यु के समय काहिरा की बत्तियाँ गुल हो जाना; और इंग्लैंड में उनके कुत्ते का मर जाना।मिथक का मुख्य "सबूत"—"मौत शीघ्र ही अपने पंखों पर आएगी..." वाला शिलालेख—पूरी तरह से मनगढ़ंत है।मकबरे में ऐसा कोई अभिशाप नहीं मिला। हॉवर्ड कार्टर ने स्वयं इसे "बकवास" कहकर खारिज कर दिया था।यह वाक्यांश प्रतिद्वंद्वी अखबारों द्वारा गढ़ा गया था।मकबरे में मिले वास्तविक लेख बुक ऑफ द डेड (मृतकों की किताब) के सुरक्षात्मक मंत्र थे, जो फिरौन को परलोक में मदद करने के लिए थे।"पीड़ितों" की लंबी सूची पुष्टि पूर्वाग्रह (confirmation bias) का परिणाम है, जहाँ किसी भी मृत्यु या दुर्भाग्य को "सबूत" मान लिया गया। वैज्ञानिक ...
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