माँ बचाओ बिदिया बस इतना ही बोल पाई थी की भालू ने बिदिया को सोलटा और उसके कपड़ों सहित पकड़ अपनी Podcast Por  arte de portada

माँ बचाओ बिदिया बस इतना ही बोल पाई थी की भालू ने बिदिया को सोलटा और उसके कपड़ों सहित पकड़ अपनी

माँ बचाओ बिदिया बस इतना ही बोल पाई थी की भालू ने बिदिया को सोलटा और उसके कपड़ों सहित पकड़ अपनी

Escúchala gratis

Ver detalles del espectáculo

OFERTA POR TIEMPO LIMITADO | Obtén 3 meses por US$0.99 al mes

$14.95/mes despues- se aplican términos.
सरुली बहुत तेजी से भागीती हुयी गाँव के चोक तक पहुंची और हांफते हुए चिलाने लगी बिदिया को भालू ने उठा लिया है जल्दी चल कर उसे बचाओ नहीं तो वो उसे मार देगा जल्दी कुछ करो जल्दी बचा लो बिंदिया को ये कहानी हैं जोशीमठ के एक गाँव की यह गाँव जोशिमठ बाजार से थोड़ी ही दुरी पर है गाँव के अधिकतर लोग खेती करते हैं और पशु पालते हैं और पशुवों के लिए चारे के लिए जंगल में उग रही घास और पत्तियों पर निर्भर रहते हैं अधिकतर सभी घास लेने के लिए महिलाएं ही जंगल जाती हैं बिंदुली बहुत ही होनहार बालिका है वह अभी B.Sc फाइनल इयर में पढ़ती है और जिस दिन कॉलेज की छुट्टी होती है उस दिन माँ को मदद करने के लिए माँ के साथ घास लेने उनके साथ जंगल चली जाती है एक दिन की बात है जब कॉलेज की छुट्टी थी तो बिंदुली अपनी माँ और अन्य महिलाओं के साथ घास लेने के लिए जंगले गयी हुई थे एकसाथ जंगल जाने में कई फायदे होते हैं एक तो साथ बना रहता है काम में मन लगा रहता है और क्यूंकि की जंगल में कभी कभी जंगली जानवरों जैसे गुलदार, बाग़ आदि से सामना होता है तो वो ज्यादा लोगों को देख भाग जाते हैं जंगल गाँव से लगा हुवा था बस मुस्किल से 500 मीटर की चढाई के बाद उन सभी ने घास काटना शुरू कर दिया कुछ आपस में बात कर रहे थे कुछ मस्ती में पहड़ी गीत गाते हुए घास काट रहे थे बिंदिया और उसकी माँ गदरे के किनारे गदेरा जो की पहड़ी नाला है के पास में ही एक दुसरे से थोड़ी दुरी पर ही घास काट रहे थे बिंदिया घास काट काट कर अपनी पीठ पर लगी बांस की लम्बी से टोकरी जिसे सोलटा बोलते हैं उसमें डालने में व्यस्त थी की अचानक बिंदिया के सामने एक भालू आ गया माँ बचाओ माँ बचाओ बिदिया बस इतना ही बोल पाई थी की भालू ने बिदिया को सोलटा और उसके कपड़ों सहित पकड़ अपनी गुफा में खींच लिया और उसे अन्दर छोड़ कर खुद बहार आ कर बैठ गया बिंदिया चिलाने के अलावा कुछ नहीं कर पाई अचानक हुए इस हमले में बिंदिया की घास काटने की दरांती भी हाथ से छूट गयी थी भालू ने इतनी फुर्ती से या काम किया था मेरी बेटी को भालू खींच कर अपनी गुफा में लगाया कोई बचाओ मेरी बेटी को कोई बचाओ मेरी बेटी को माँ भी चिल्लाने के सिवाय कुछ नहीं कर पाई पहाड़ों में रहने वाले अधिकतर लोग जंगली जानवरों के हमले में सबसे जयादा भालू के द्वारा किये गए हमले में ही घायल होते हैं गुफा के बहार धुप ...
Todavía no hay opiniones