मैं शिक्षक हूं Podcast Por  arte de portada

मैं शिक्षक हूं

मैं शिक्षक हूं

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मैं शिक्षक हूँ

सवाल फिर वही था, पर मैं जवाब नया बताता हूँ l
कौन हूँ, मैं क्या करता हूँ, कविता के ज़रिये सुनाता हूँ∥

सुन्दर सी इक बगिया है और मैं हूँ उसका बाग़बान l
जहाँ नन्हे पौधे फल-फूलकर बनते इक दिन वृक्ष महान∥

मेरा काम है इन नन्हे परिंदों के परों में जान भरना l
ताकि वो सीख पाएं अपने हौसलों की उड़ान भरना∥

इनके सपनों की ज़मीं को मंज़िल के आसमां से जोड़ता हूँ l
सुनहरे कल के सृजन हेतु मैं अपना पुरुषार्थ निचोड़ता हूँ∥

इन कच्चे घड़ों को अपने ज्ञान-तप से पकाता हूँ l
इसलिए शिल्पी शिल्पकार जैसे नामों से पुकारा जाता हूँ∥

कलम, किताब, चॉक और बालक, इन्हीं से मेरी पहचान है l
अध्यापन है मेरा पेशा और मुझे इस पर अभिमान है∥

तराश कर हुनर इनके, मैं इन्हे क़ाबिल बनाता हूँ l
मैं एक शिक्षक हूँ जनाब और बच्चों को पढ़ाता हूँ∥

ज्ञान और विवेक से मैं इनके भविष्य गढ़ता हूँ l
अपने उत्तम अध्यापन हेतु स्वयं घंटों तक पढता हूँ∥

प्रलय और सृजन का बीज मेरी गोद में पलता है l
मैं विशिष्ट कृति हूँ विधाता की, मेरे पीछे ज़माना चलता है∥

जो बीच राह मैं भटक गए मैं उन्हें राह दिखलाता हूँ l
मैं शिक्षक, गुरु, मैं मार्गदर्शक, मैं ही राष्ट्रनिर्माता हूँ∥

ये महज़ पेशा नहीं, सेवा है, जिसको हमने अपनाया है l
बड़ी ख़ुशी से इस ज़िम्मेदारी को हमने गले लगाया है∥

आओ मिल संकल्प करें कि हम अपना फ़र्ज़ निभाएंगे l
अपने प्यारे भारतवर्ष को फिर विश्वगुरु बनाएंगे∥
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