बॉस की दावत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद Podcast Por  arte de portada

बॉस की दावत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

बॉस की दावत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

Escúchala gratis

Ver detalles del espectáculo

OFERTA POR TIEMPO LIMITADO | Obtén 3 meses por US$0.99 al mes

$14.95/mes despues- se aplican términos.
घर पर बॉस की दावत थी इसलिए शामनाथ साहब सुबह से तैयारियों में लगे थे. पर्दे बदल दिए गए, मेज़पोश नए बिछाए, अलमारी में सजे बर्तन निकाल लिए गए. यहां तक की सोफे़ के नीचे की गर्द भी साफ की गई थी लेकिन पूरे चमचमाते घर में मां अटपटी लग रही थीं. गांव की मां जो ना ढंग से बोल पाती है, न उसे कुछ आता-जाता है, चेहरा भी अब झुर्रियों से ढक गया है. शामनाथ साहब ने मां की तरफ़ देखा और सोचा कि इनको कहां छिपाया जाए कि अंग्रेज़ बॉस की नज़र ना पड़े - सुनिए स्टोरीबॉक्स में भीष्म साहनी की लिखी कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
Todavía no hay opiniones